मोबाइल पेमेंट वालेट के डाटा की सुरक्षा को लेकर चिंता

 नई दिल्ली : मोबाइल वालेट से होने वाले भुगतान देश को डिजिटल इकोनॉमी की दिशा में आगे तो बढ़ा रहे हैं। लेकिन वालेट पर एकत्र हो रहा लोगों के डाटा की सुरक्षा की चिंता भी लगातार बढ़ रही है। इस डाटा को देश में ही स्टोर करने के रिजर्व बैंक के निर्देश के बावजूद निजी डाटा की सुरक्षा को लेकर नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर ने चिंता जताई है।

डिजिटल पेमेंट की रफ्तार बढ़ाने को बीते दो साल में मोबाइल वालेट की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। पेटीएम, मोबिक्विक और फोनपे जैसे शुरुआती वालेट के बाद अब इस क्षेत्र में गूगल, वाट्सएप जैसे बड़े खिलाड़ी भी शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मोबाइल वालेट से होने वाले ट्रांजैक्शन की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है।

साल 2017-18 में देश में होने वाले कुल डिजिटल भुगतान में वालेट की हिस्सेदारी छह फीसद रही जो इस सूची में पांचवे स्थान पर आता है। 16 फीसद हिस्सेदारी के साथ डेबिट कार्ड पहले स्थान पर रहा है। इसके बाद एनईएफटी, इंटरनेट बैंकिंग, और क्रेडिट कार्ड से होने वाले डिजिटल पेमेंट का स्थान है।

डिजिटल पेमेंट पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में हुई एक समीक्षा बैठक में नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटरने वालेट से होने वाली ट्रांजैक्शन में लोगों के संवेदनशील निजी डाटा के एकत्र होने पर चिंता जताई है। एनसीएससी का मानना है कि एप्स के जरिए सेवाएं देने वाले पेमेंट सर्विस प्रदाता लोगों का निजी डाटा अपने पास रख रहे।

इसे लेकर चिंता इसलिए भी है क्योंकि नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) बैंकों और इन पेमेंट सेवा प्रदाताओं के बीच जो करार होता है उसमें लोगों के डाटा की जिम्मेदारी न तो एनपीसीआइ पर डाली गई है और न ही सेवा प्रदाता इसकी जिम्मेदारी ले रहे हैं। इतना ही नहीं लीकेज, डाटा शेयरिंग और चोरी को लेकर ग्राहकों के हितों की सुरक्षा का भी कोई प्रबंध नहीं है। ऐसे में यह जरूरी है कि सेवा प्रदाताओं पर देश के कानूनी ढांचे और रेगुलेटर के नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी हो।

एनसीएससी के इन विचारों से इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी सहमति जताई है। मंत्रालय ने आरबीआइ को सुझाव दिया है कि वह इस संबंध में नियम तय करे ताकि लोगों के डाटा को एकत्र करने, उसका इस्तेमाल और डाटा शेयरिंग से ग्राहकों के हितों की सुरक्षा की जा सके। हालांकि इसी साल 6 अप्रैल को रिजर्व बैंक ने एक सर्कुलर जारी करके भारत में होने वाले सभी तरह के डिजिटल भुगतानों का डेटा देश में रखने के निर्देश दिये थे।

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