एक होती है निष्पक्षता के मूल्यों से बँधी पत्रकारिता/ प्रमोद जोशी

एक होती है निष्पक्षता के मूल्यों से बँधी पत्रकारिता और दूसरी कार्यकर्ता, प्रचारक, मौका परस्त या किसी के हितों को पूरा करने वाली पत्रकारिता। विचारवान होना पत्रकार को पक्षपाती नहीं बनाता। सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति विचारवान होता है।

विचारधारा से आबद्ध व्यक्ति पक्षपाती नहीं हो जाता। पक्षधर और पक्षपाती यदि शब्द हैं तो उनके माने भी हैं। निष्पक्ष शब्द के भी माने हैं। तटस्थ और निष्पक्ष का आशय भी समान नहीं है। निष्पक्ष जैसा कुछ नहीं होता कहने भर से बात खत्म नहीं हो जाती। खास मौकों पर काम करने के मूल्य होते हैं जो इस कर्म की साख बनाते हैं। अदालतें फैसले करने के पहले तथ्यों को कुछ कसौटियों पर जाँचती हैं। फिर भी फैसले को चुनौती दी जाती है। महत्वपूर्ण है कसौटियाँ। व्यक्ति के पक्षपात और विवेकशीलता की विभाजक रेखा भी होती है। पत्रकार के सामने दो अलग-अलग मौके होते हैं। एक मौका होता है ऑब्जेक्टिव रिपोर्टिंग का। दूसरा मौका होता है अपने विचार व्यक्त करने का। दोनों मौकों पर उसकी अपनी धारणाएं भी होती हैं। ऑब्जेक्टिव रिपोर्टिंग के वक्त उसे कुछ नियमों को मानना ही चाहिए। यों बहुत से पत्रकार खबरें प्लांट करते हैं या प्रचारक जैसा काम करते हैं। उन्हें सही तो नहीं कहा जा सकता। यह कहते हुए कि निष्पक्षता सम्भव ही नहीं है और उसका दावा भी नहीं करना चाहिए।

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मेरे मन में यह सवाल क्यों आया, इसे भी लिखना चाहिए। 1975 में रिचर्ड डॉकिन्स ने किताब लिखी सेल्फिश जीन। उसके बाद उद्विकास को लेकर कई वैज्ञानिकों ने इस आशय की पुस्तकें लिखीं कि मनुष्य के जीन्स में स्वार्थ है या निस्वार्थ। दरअसल दोनों ही बातें मनुष्य की प्रकृति में मिलती हैं। कहा जाता है देयर इज नो फ्री लंच। हर चीज अपनी कीमत लेती है। पर प्रकृति में परोपकारी प्रवृत्ति भी मिलती है, जिसके पीछे कोई कीमत वसूलने की भावना दिखाई नहीं पड़ती। दूसरी तरफ हमारे पास मत्स्य न्याय के उदाहरण हैं। पशु जगत में भी स्वार्थ और निस्वार्थ दोनों प्रवृत्तियाँ दिखाई पड़ती हैं। सवाल है कि मनुष्य समाज क्या प्राकृतिक नियमों के साथ विकसित हो रहा है? मेरे पास इन बातों का कोई जवाब नहीं है। मैंने जो प्रश्न सामने रखा उसके जवाब इस प्रश्न को कई दिशाओं में ले जाते हैं। इसी तरह की एक किताब से जुड़ी खबर का लिंक यहाँ है।https://www.telegraph.co.uk/…/The-truth-about-our-not…

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