जन मन भावन , वोट लुभावन बजट /टिल्लन रिछारिया


जन मन भावन , वोट  लुभावन बजट के मूल में किसान, मजदूर और नौकरीपेशा मध्यमवर्ग है। केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने  संसद में बजट पेश करते हुए किसानों, कामगार तबके और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए कई घोषणाए की।  

इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव का असर इस बजट में देखने को मिला है, बजट के जरिए जन मन को  साधने की कोशिश की है।   छोटे किसानों को सालाना 6,000 रुपये की न्यूनतम सहायता देने और पांच लाख रुपए तक सालाना आय वालों को कर से मुक्त किया गया है।  कामगार वर्ग के लोगों के लिए पीएम श्रम योगी मानधन वृहद पेंशन योजना  शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके तहत 60 साल की उम्र के बाद हर महीने तीन हजार रुपये पेंशन मिलेगी. बेरोजगार युवा  के लिए सिर्फ़ मायामृग। 

किसान गुस्से में है। दो हेक्टेयर से कम के काश्तकार को सालाना 6 हजार रूपए। खाद-बीज और पेस्टीसाइड के दाम हर साल इस 6 हजार के डेढ गुने-दूने हो जाते हैं।पिछले चार सालों से खेती को मुनाफे का धंधा बनाने, और आमदनी दूनी करने की बात तो की जाती रही लेकिन हुआ यह कि खेती की लागत न्यूनतम समर्थन मूल्य के आगे-आगे ही भागती चल रही है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए जो भी राहत है वह 2009 के मनरेगा से निकला सबक है जिसने यूपीए को दोबारा ताजपोशी करने की मदद की। हेल्थकेयर और पेंशन की योजनाएं राहत देने वाली हैं।

अरसे बाद मध्यमवर्ग की चिंता दिखी। इनकम टैक्स का स्लैब ढ़ाई से पाँच लाख पहुंच गया। इनवेस्टमेंट और हाउसिंग लोन में भी टैक्स के छूट के प्रावधान है। इसे आप चुनावी छक्का कह सकते हैं। इस चुनाव में किसानों के ही बराबर का मुद्दा युवाओं और उनकी बेरोजगारी का है। बजट के एक दिन पहले ही सांख्यिकी आयोग की लीक हुई रिपोर्ट ने बताया  कि बेरोजगारी पैतालीस साल के उच्चतर पर है। सरकार भले ही किंतु-परंतु करे लेकिन जाँब तो पाँच में से सिर्फ एक के पास है। इसमें कोई संदेह नहीं कि पिछले चार सालों में युवाओं को रोजगार देने की एक से एक आकर्षक योजनाएं बनी। पूरा फोकस इस बात पर रहा कि युवा नौकरी मांगने की बजाए अपने पाँव पर खड़े हों। लेकिन उसका जमीनी असर दिखा नहीं। 

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट 2019-20 पेश किया. उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के अहम मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अगले एक दशक के लिए एक विजन पेश किया है. उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे, जहां गरीबी, कुपोषण, गंदगी और निरक्षरता बीते समय की बातें होंगी. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत एक आधुनिक, प्रौधोगिक से संचालित, उच्च विकास के साथ एक समान और पारदर्शी समाज होगा. परिकल्पना-30 में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि अगले दस साल में कौन से दस काम करेगी सरकार… 

  • >>10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और सहज-सुखद जीवन के लिए भौतिक और सामाजिक अवसंरचन का निर्माण करना है.
  • >>एक ऐसे डिजिटल भारत का निर्माण  करना है, जहां हमारे युवा वर्ग डिजिटल भारत के सृजन में व्यापक स्तर पर स्टार्ट-अप और इको-सिस्टम में लाखों रोजगार पैदा करते हुए इसका नेतृत्व करेगा.
  • >>भारत को प्रदूषण मुक्त राष्ट्र बनाने के लिए इलेक्ट्रिकल वाहनों और नवीकरण ऊर्जा पर विशेष ध्यान देना.
  • >>आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके ग्रामीण औधोगीकीकरण विस्तार के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना.
  • >>सभी भारतीयों के लिए सुरक्षित पेयजल के साथ स्वच्छ नदियां और लघु सिंचाई तीकनों को अपनाने के माध्यम से सिंचाई में जल का कुशल उपयोग करना.
  • >>सागरमाला कार्यक्रम की कोशिशों में तेजी लाने के साथ भारत के तटीय और समुद्री मार्गों के माध्यम से देश के विकास को सशक्त बनाना.
  • >>हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम-गगनयान, भारत दुनिया के उपग्रहों को छोड़ने का ‘लॉन्च पैड’ बन चुका है और 2022 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना इस आयाम को दर्शाता है.
  • >>सर्वाधिक जैविक तरीके से खाद्यान्न उत्पादन और खाद्यान्न निर्यात में भारत को आत्म निर्भर बनाना और विश्व की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद्यान्नों का निर्यात करना.
  • >>2030 तक स्वस्थ भारत और एक बेहतर स्वास्थ्य देखभाल एवं व्यापक आरोग्यकर प्रणाली के साथ-साथ आयुष्मान भारत और महिला सहभागिता भी इसका एक अहम घटक होगा.
  • >>भारत को न्यूनतम सरकार, अधिकतम अभिशासन वाले एक ऐसे राष्ट्र का रूप देना, जहां एक चुनी हुई सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले सहकर्मियों और अधिकारियों के अभिशासन को मूर्त रूप दिया जा सकता है.यह बजट पर्व चुनाव अभियान  के साथ साथ चलेगा। जश्नो जोश का यह कारवां कितने फल फूल लाता है , अभी बताना मुश्किल है। हां जन मानस को भरमाने  के लिए एक मायामृग तो मिल ही गया। अहसास खुशफहम है। 

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