नीरव मोदी लंदन में गिरफ्तार , भारत वापसी में अभी इंतजार


सुनील वर्मा

पंजाब नेशनल बैंक, नीरव मोदी, सीबीआई, प्रर्वतन निदेशालय और अदालत ये तमाम नाम मानों एक दूसरे के पूरक बन गए है। पिछले करीब एक साल से ये सारे नाम पूरे देश की जनता के कान में घू-घू कर बज रहे है। अब जब ये बात सामने आ रही है कि पीएनबी से 14 हजार करोड़ रुपये का बैंक घोटाला करके फरार हुए हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है जिसके बाद ऐसा दृश्‍य प्रस्‍तुत किया जा रहा है कि मानों वह अगले कुछ दिन में ही गिरफ्तार होकर भारत आ जाएगा और सलाखों के पीछे ठूंस दिया जाएगा। लेकिन यह सिर्फ आंखों का धोखा है। हांलाकि लंदन की पुलिस ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया है। लेकिन उसे भारतीय एजेसियों के सुपुर्द करने में अभी वक्‍त लगेगा। क्‍योंकि भगौडे आर्थिक अपराधियों को देश वापस लाने की प्रक्रिया और कानून इतना जटिल है कि नीरव मोदी जैसे अपराधी इसका फायदा उठाकर जांच एजेंसियों का सालों साल कानूनी उलझनों में फंसाकर मौज उडाते रहते है।  

जो लोग नहीं जानते उन्‍हें जान लेना चाहिए कि नीरव मोदी के पास अभी गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ उपरी अदालत में अपील करने का विकल्‍प है। इसी प्रक्रिया में 6 से दस महीनों का वक्‍त लग सकता है। क्‍योंकि बैंकों का पैसा लेकर लंदन में जा छिपे विजय माल्या के केस में भी ऐसा ही हुआ है। हां ये तय है कि भले ही इसमें देर लगे लेकिन नीरव मोदी के पास अब बचने के उपाय नहीं है उसकी गिरफ्तारी देर सबेर होकर रहेगी। सिर्फ नीरव मोदी ही नहीं बल्कि उसकी पत्‍नी एमी, भाई निशाल मोदी नेबल मोदी, बहन पूर्वी मोदी देर सबेर सीबीआई और ईडी के चंगुल में फंसेगे। दरअसल, प्रर्वतन निदेशालय ने पीएनबी घोटाले की जांच में पिछले दिनों ही एक पूरक चार्जशीट अदालत में पेश की जिसमें नीरव की पत्‍नी एमी के अलावा इन सभी को भी आरोपी बनाया गया है। एमी मोदी के खिलाफ तो अदालत ने गैर जामपती वारंट भी जारी कर दिया है। जाहिर है एक दो तारीखों के बाद उसे भी भगोडा घोषित कर दिया जाएगा और फिर उसके प्रर्त्‍यापण की प्रक्रिया भी शुरू होगी। इस घोटाले में जितने भी आरोपी देश छोडकर फरार हुए है उन सभी के खिलाफ कमोबेश यही प्रक्रिया अपनायी जानी हे। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामलें में अभी तक अदालत को जो अतिरिक्त सुबूत दिए हैं। उसके मुताबिक घोटाले की धनराशि को ठिकाने लगाने में एमी के अलावा नीरव मोदी के परिवार के सभी सदस्‍यों की कहीं न कहीं सक्रिय भमिका रही है। पीएनबी घोटाले में पहला आरोप पत्र मई 2018 में दाखिल किया गया था। उसमें आरोप लगाया गया था कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर कई बैंक अधिकारियों को अपने प्रभाव में लिया और 14 हजार करोड़ रुपये का घोटाला कर डाला। दरअसल पीएनबी के कुछ अधिकारियों की मदद से नीरव मोदी ने साख पत्रों के आधार पर अपनी अलग-अलग कंपिनयों के नाम से करोड़ो के कर्ज लिए और फिर उन्‍हें वापस नहीं लौटाया। हैरत इस बात पर है कि पिछला बकाया चुकाए बिना नीरव मोदी की किसी दूसरी कंपनी को अगला लोन मिल जाता था। इस तरह उसने कई सालों में पीएनबी की अलग-अलग शाखाओं को 14 हजार करोड का चूना लगा दिया। जब तक उससे वसूली करने की पहल शुरू होती वह परिवार के साथ देश छोडकर फुर्रर हो चुका था।

बॉलीवुड में नीरव मोदी की धाक

ये अलग बात है नीरव मोदी आज अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशो में भटक रहा है कानूनी लडाईया लड रहा है लेकिन ये सच भी किसी से छिपा नहीं है कि इस घोटाले के उजागर होंने से नीरव मोदी देश की ऐसी शखसियत होता जो देश और दुनिया के बड़े बडे नेताओं के साथ फोटों खिंचवाता था और उनसे हाथ मिलता था। नीरव मोदी के हॉलीवुड और बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया से भी गहरे संबंध थे। उनके ब्रांड को प्रियंका चोपड़ा, एंड्रिया डायाकोनु और रोजी हंटिंगटन प्रोमोट करते हैं। 46 साल के नीरव मोदी वॉर्टन ड्रॉपआउट हैं। उनकी ज्वेलरी के दाम 5 लाख से 50 करोड़ रुपए तक थे। चकाचौंध भरे हालीवुड से लेकर वालीवुड तक की खूबसूरत हसीनाएं उनकी महफिलों की शान होती थी और नीरव मोदी उनके बगलगीर होकर फोटो सेशन कराते थे। लेकिन येसभी लोग उनसे अपने संबधों को सिर्फ व्‍यवसायिक बताते है। बहरहाल ये तो वक्‍त –वक्‍त की बात है। मोदी के पिता अपने वक्‍त में बडे हीरा कारोबारी थे जो भारत से एंटवर्प चले गए। हालांकि नीरव मोदी कुछ साल बाद वापस मुंबई आ गए। मुंबई में उन्होंने अपने चाचा मेहुल चौकसी से व्यापार करना सीखा। पीएनबी घोटाले मेहुल चौकसी का भी नाम शामिल है।  इस घोटाले के उजागर होंने के बाद सीबीआई ने पीएनबी की शिकायत के आधार पर नीरव मोदी के खिलाफ 11400 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लेन-देन के आधार पर मोदी व उससे जुड़ी आभूषण कंपनियां के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई पीएनबी की शाखा में 280 करोड़ रुपये की ठगी और धोखाधड़ी के मामले नीरव के खिलाफ पहले से ही एक जांच कर रही है।

चूंकि पीएनबी घोटाले में अर्जित की गई धनराशि का दूसरे कामों में इस्‍तेमाल कर धन को विदेशों में बनायी गई 200 से अधिक फर्जी कंपनियों के जरिए विदेश ट्रांसफर किया गया था। इसलिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी धन शोधन के मामले में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया करके जांच शुरू की थी। ईडी ने पीएनबी में हुई 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के संबंध में नीरव मोदी एवं अन्य के खिलाफ मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज किया है। 31 जनवरी को यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया गया।

ऐसे की गई धोखाधड़ी

इस घोटाले की जांच जैसे जैसे आगे बढी तो पता चला कि किस तरह नीरव मोदी ने धोखाघडी को अंजाम दिया। पीएनबी के अधिकारियों ने धोखाधड़ी कर अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े फर्मों को साख पत्र (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) दिया। इससे उन्होंने विदेशों में निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों से रुपया भुनाया। यह सब 2011 से काम कर रहे बैंक के उप-महाप्रबंधक के स्तर के अधिकारियों के साथ साठगांठ कर किया गया। नीरव मोदी से जुड़े तीन फर्म, मै. डायमंड्स आर यूएस, मै. सोलर एक्सपोर्ट्स, मै. स्टेलर डायमंड्स ने बैंक को संपर्क कर बायर्स क्रेडिट की मांग की जिससे वे अपने विदेश के कारोबारियों को भुगतान कर सकें। नीरव मोदी, निश्चल मोदी, अमी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी इन फर्म में पार्टनर थे। इन फर्म को बैंक के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत से बायर्स क्रेडिट प्रदान की गई, जबकि उनका कोई पुराना बेहतर क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं था। इसके बाद हांगकांग की बैंक शाखाओं में धन का स्थानांतरण किया गया।

बायर्स क्रेडिट छोटी अवधि का क्रेडिट ( 90 से 180 दिनों) का होता है जिसे अंतरराष्ट्रीय बैंक प्रदान करते हैं। यह आयात करने वाले बैंक से प्राप्त पत्र के आधार पर जारी होता है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) पीएनबी में हुई 11 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में कई आभूषण कंपनियों समेत बैंकों द्वारा खुलासा करने में हुई खामियों की जांच कर चुका है जिसमें कई खामियों पायी गई है इसी के बाद वित्‍त मंत्रालय ने इस प्रक्रिया की पुन: सरंचना करने के लिए एक कमेटी बनायी है ताकि बैंकों की मिली भगत से कोई कारोबारी फिर ऐसा न कर सके।

फोर्ब्‍स की सूची में था मोदी

2016 की फोर्ब्स की सूची के मुताबिक, 11, 237 करोड़ की संपत्ति के मालिक नीरव देश के सबसे रईस लोगों की गिनती में 46वें पायदान पर था। ज्वैलरी की दुनिया खासकर हीरा कारोबार में मशहूर नाम नीरव मोदी मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं। उनके पिता हीरे के व्यापार से जुड़े थे और इसे ही नीरव मोदी ने आगे बढ़ाया। नीरव तब खासे चर्चा में आए जब क्रिस्टी ज्वैलरी नीलामी (2010) में नीरव मोदी की कंपनी फायर स्टार डायमंड का गोलकुंडा नेकलेस 16.29 करोड़ रुपये में बिका।

जैसे-जैसे नीरव मोदी केस में जांच आगे बढ़ रहै उसकी धोखाधड़ी के और भी किस्से सामने आ रहे हैं। जहां एक तरफ नीरव मोदी के पीएनबी से 11,000 हजार करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग सुर्खियां बटोरे हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर 17 बैंकों से 3,000 करोड़ रुपए के फ्रॉड के सबूत भी उसके खिलाफ सामने आ चुके हैं। नीरव मोदी ने पीएनबी की तरह ही धोखाधड़ी कर दूसरे बैंकों की शाखाओं से साख पत्र हासिल किए और विदेशों में अन्य भारतीय बैंकों से क्रेडिट हासिल कर ली।

दिलचस्‍प बात ये है कि नीरव मोदी बैंकों से ठगे गए पैसों का विदेश में स्थित संपत्तियों में बड़ी चालाकी से निवेश करता रहा और किसी को पता नहीं चला। ये संपत्तियों उसने विदेशों में फर्जी नाम से बनायी। जिनकी कर्ता धर्ता नीरव की बहन पूर्वी मोदी है। नीरव मोदी के परिवार छोड विदेश भागने के बाद कई महीनों तक तो उसका पता ही नहीं चला लेकिन कि वह किस देश में छिपा है। उसके विदेश भागने के बाद सियासत में भी खूब गरमी पैदा हुई। जहां सत्‍तारूढ बीजेपी नीरव के घोटाले को कांग्रेस की पूर्व सरकारों को दोषी मानती रही तो वहीं कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष आज तक नीरव मोदी के घोटाले का मोदी सरकार से मिली भगत से जोडकर प्रचारित कर रहा है।

भारत सरकार को सबसे बडी राहत पिछले दिनों उस वक्‍त मिली जब पता चला कि मोदी ने ब्रिटेन से गोल्‍ड वीजा लेकर वहां हीरे के कारोबार के साथ अपना ठिकाना बना लिया है। ये बात एक विदेशी अखबार ने उजागर भी कर दी। इसी के बाद भारत सरकार तेजी से सक्रिय हुई और नीरव मोदी के खिलाफ प्रत्‍यापर्ण की कार्रवाही तेज हुई। उसी का नतीजा रहा कि लंदन की वेंट मिस्‍टर कोर्ट ने चंद रोज पहले नीरव के खिलाफ अरेस्‍ट वारंट जारी किया। लेकिन भगौडे नीरव मोदी के खिलाफ ये लडाई का अंत नहीं है लडाई अभी जारी है।   

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