लोकेशन नहीं बदलेगा- ऐसा बिहारी बाबू ने कर दिखाया

-परशुराम शर्मा

सिचुएशन कुछ भी हो, लोकेशन नहीं बदलेगा- ऐसा बिहारी बाबू ने कर दिखाया। कांग्रेस ने उन्हें पटना साहिब से चुनाव लड़ने का मौका दिया। प्रधान मंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान कल कांग्रेस को डूबता टाइटैनिक जहाज करार दिया।

कांग्रेस में शामिल होते समय कल ही शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने भाजपा छोड़ने के कारण गिनाते हुए पनपते तानाशाही का जिक्र किया और वन मैन शो और टू मेन आर्मी वाला पार्टी बताया।इसके लिए उन्होंने भाजपा से अपना दशकों पुराना नाता तोड़ दिया।वे कांग्रेस से जा मिले। अब वे कांग्रेस के टिकट पर पुन: पटना साहिब से ही लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे।भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दी। कांग्रेस ने दे दिया। उपर से लालू प्रसाद का समर्थन मिला।एक लम्बे समय से पार्टी के उनके कुछ लोग यहां अंदरुनी खिलाफत में लगे थे। बड़बोलेपन की वजह से बिहारी बाबू का दिल्ली से रिश्ता बिगड़ा, तो स्थानीय शत्रु शौट गन के साथ भीतरघात में लग गये। सब की अपनी महत्वाकांक्षा थी। स्थिति को भांपते हुए बिहारी बाबू भी डैमेज कंट्रोल में लगे। अब वे कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक बन गये। कभी भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक बना कर दशकों पूर्व पार्टी में बड़े तामझाम से उतारा था।पटना साहिब में भाजपा उम्मीदवार व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के लिए  लड़ाई कांटे की हो गई है। इस बीच पटना साहिब से ही भाजपा का टिकट चाहने वाले रविन्द्र किशोर ‘आराम’ की मुद्रा में आ गये हैं। देखना है कि कायस्थ मतदाता बहुल इस सीट पर अब आगे किसका कब्जा होता है ? लड़ाई रोचक है।

बिहारी बाबू यहां पहले से ही कब्जा किये बैठे हैं। लोक सभा के इस चुनाव में यह फैसला होना है कि भाजपा की यह सीट उसे दोबारा मिलेगी या कांग्रेस के झोले में जायेगी। यहां से अबतक जीतने वाले बिहारी बाबू ने सीट तो नहीं बदली, बल्कि अपनी पार्टी ही बदल दी। कांग्रेस को उम्मीद है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के नेतृत्व वाले महागठबंधन का सामूहिक समर्थन बिहारी बाबू का अतिरिक्त ताकत हो सकता है।उधर,  भाजपा पूरी तरह आश्वस्त है कि यह सीट भाजपा की रही है और इस बार भी भाजपा की ही रहेगी। उसका तर्क है कि इस लोक सभा संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाले अधिकांश विधायक भाजपा के हैं। वे भाजपा के अपने नये लोक सभा प्रत्याशी रविशंकर प्रसाद की जीत के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे। यह सीट किसी भी कीमत पर कांग्रेस के पास नहीं जाने देंगे।अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहारी बाबू  यहां अपनी शाख कैसे बचाते हैं? शाख बचाने का सवाल तो मोदी मंत्रिमंडल के कद्दावर केन्द्रीय मंत्री व भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद के सामने भी है। अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में पहली बार वे लोक सभा के चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमाने उतरे हैं।

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