चुनाव से ठीक पहले काले धन पर आयकर विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक

-पी के तिवारी 


  भोपाल, इंदौर, दिल्ली नोएडा समेत देश के 50 से अधिक स्थानों पर इनकम टैक्स के छापे के दायरे में मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे, उनके दो ओएसडी प्रवीण कक्कड़, राजेंद्र मिगलानी समेत नौकरशाहों पर मजबूत पकड़ रखने वालों दूसरे लोगों के आने से सियासत गरमा गई.. मध्य प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा जब मुख्यमंत्री से सीधे जुड़े जिम्मेदार अधिकारी और रिश्तेदार इनकम टैक्स के निशाने पर एक साथ आए .. कई महीने की  तैयारी  और सही समय के इंतजार में आधी रात के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान सामने नोटों के बंडल और दस्तावेज की छानबीन की गूंज लाजमी थी, जो मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक सुनाई भी दी..


राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच इस बड़ी कार्रवाई ने कांग्रेस को सकते में डाला.. ऐसे में बीजेपी को सवाल खड़ा करने का मौका मिल गया.. करोड़ों रुपए बरामद होने की अधिकारिक पुष्टि होना भले ही बाकी हो, लेकिन जिस तरह सीआरपीएफ और स्थानीय मध्यप्रदेश पुलिस कार्रवाई के दौरान पूछताछ के तौर तरीके  को लेकर आमने-सामने आई.. उससे साफ है कि एजेंडा बड़ा और लड़ाई आर पार की तो फिर इसे चुनाव से जोड़कर ही देखा जाए ..   रात 3 बजे स्थानीय विभाग के अधिकारियों और पुलिस को इस कार्रवाई की यदि भनक नहीं लगी तो समझा जा सकता है कि गोपनीयता कितनी महत्वपूर्ण साबित हुई, जो इसकी भनक किसी को भी नहीं लग पाई.. तो फिर मकसद समझा जा सकता..
आयकर विभाग की कार्रवाई और उसके दायरे में आए हाई प्रोफाइल लोगों  से क्या इसके तार सरकार के नीति-निर्धारक और दखल रखने वालों से जुड़ेंगे.. फिलहाल राजनीतिक लोग ही इस कार्यवाही के दायरे में आए ना कि कोई बड़ा अधिकारी ..तो क्या इससे कांग्रेस से ज्यादा कमलनाथ और उनकी सरकार की परेशानी बढ़ेगी.. जब  भ्रष्टाचार को एक बार फिर मोदी और शाह की भाजपा बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है.. यानि चुनाव प्रचार के दौरान कौन चोर कौन चौकीदार इस बहस का गरमाना तय है..
तो  जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उसकी टाइमिंग पर सवाल पहले भी खड़ा करती रही कांग्रेस  मध्य प्रदेश में सरकार में आने के बाद संकट में आ सकती है.. क्योंकि बेनामी  करोड़ों की नकदी और संबंधित दस्तावेज की बरामदगी कई सवाल एक साथ खड़े कर गई है.. तो सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या यह राशि इलेक्शन फंडिंग और उससे जुड़ी हवाला कनेक्शन का नतीजा है.. या फिर विरोधियों की नजर में ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए बदनाम सरकार की यह कमजोर कड़ी बनकर सामने आई ..तो फिर सवाल क्या चुनाव प्रचार के लिए जरूरी फंडिंग ने सरकार ही नहीं कांग्रेस को संकट में डाल दिया है..
तो ऐसे में बड़ा सवाल आखिर आईटी की इस कार्रवाई को परफेक्ट साबित करने में क्या किसी घर के भेदिए ने बड़ी भूमिका निभाई है.. तो फिर वह कौन है.. क्या कोई अधिकारी या फिर सरकार के अस्तित्व में आने के साथ जो जमावट की गई उसकी कमजोर कड़ी व्यवस्था में बदलाव साबित हुआ.. मैनेजमेंट के महारथी आखिर मुख्यमंत्री कमलनाथ से क्या कोई चूक हो गई, जो यह स्थिति निर्मित हुई.. यदि मान भी लिया जाए सरकार और उसके नीति निर्धारकों से कोई लेना-देना नहीं तो फिर प्रदेश की एजेंसियों और अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं मिली.. सवाल क्या नया संकट समन्वय सामंजस्य संवाद से आगे भरोसे का  कांग्रेस के अंदर निर्मित हो सकता है..
पॉलिटिक्स में टाइमिंग और परसेप्शन बहुत मायने रखता तो फिर इनकम टैक्स विभाग की इस कार्यवाही के दौरान बरामद बेनामी संपत्ति के जो आंकड़े मीडिया की सुर्खियां बन चुके यदि उसमें सच्चाई  तो फिर सरकार की छवि पर बट्टा लगने से इनकार नहीं किया जा सकता ..क्योंकि बात निकली तो दूर तलक जा पहुंची … इस मामले में  अरुण जेटली से लेकर  शिवराज सिंह चौहान  तो कमलनाथ से लेकर  आनंद शर्मा शोभा ओझा जैसे दिग्गज नेता की प्रतिक्रिया गौर करने लायक .. बहस भ्रष्टाचार  और संवैधानिक संस्थाओं के  दुरुपयोग आरोप-प्रत्यारोप  तक जा पहुंची.. 
विवाद की स्थिति निर्मित हुई पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जांच एजेंसियों को कार्रवाई नहीं करने देने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा कर इसे और गरमा दिया.. उन्होंने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को  संरक्षण देने का सीधा आरोप मुख्यमंत्री कमलनाथ पर लगाया जिनके ओएसडी और नजदीकी आयकर विभाग की कार्यवाही के दायरे में आए.. तो समझा जा सकता है कि मध्य प्रदेश में जहां चौथे दौर में मतदान की शुरुआत होगी वहां चुनाव का एजेंडा कमलनाथ और उनकी सरकार को निशाने पर लेखक लगभग सेट कर दिया है..
यह कार्यवाही उस वक्त सामने आई जब प्रचार शुरू भी नहीं हुआ  मध्यप्रदेश में कुछ गिनी चुनी लेकिन महत्वपूर्ण सीटों पर तगड़े मुकाबले की संभावना के बीच कुछ उम्मीदवारों का ऐलान होना बाकी है तो दिग्विजय सिंह भोपाल लोकसभा सीट से पहले ही चुनाव मैदान में उतर चुके जो ओंकारेश्वर की परिक्रमा के बाद अपने प्रचार अभियान को एक नई दिशा देने की तैयारी में.. वह भी तब जब भाजपा प्रतिष्ठा पूर्व भोपाल  सीट पर अपने प्रत्याशी को लेकर अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है.. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में अपनी सरकार बनाने के बाद बीजेपी को कमजोर साबित करने के लिए एक साथ कई मोर्चे पर अपनी बिसात बिछाई…
चाहे फिर वह सरकार की उपलब्धियां हो या फिर कार्यकर्ताओं को ताकत देने के साथ प्रबंधन के मोर्चे पर जरूरी इंतजाम.. कमलनाथ सरकार जिस पर वचन पत्र को लागू करने और खासतौर से किसान और युवाओं से वादा निभाने का दबाव लगातार बढ़ रहा ..तब सरकार के गरीबी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ इनकम टैक्स की कार्यवाही और इस दौरान बरामद करोड़ों की राशि और दस्तावेज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.. विपक्ष खासतौर से बीजेपी को जो आरोप लगाने और सवाल खड़ा करने का मौका मिला उसकी वजह है इनकम टैक्स की कार्यवाही और इस दौरान सामने आए तथ्य..


ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि घर का भेदी कौन.. जिसके कारण यह स्थिति निर्मित हुई क्योंकि विपक्ष इसे ट्रांसफर पोस्टिंग और चुनाव के लिए जरूरी चंदा फंडिंग और हवाला कारोबार से जोड़ रहा है.. जांच एजेंसी की कार्यवाही सटीक यदि साबित हुई तो फिर यह उसके सूचना तंत्र की सफलता है.. यदि सूचना दुरुस्त नहीं होती तो फिर जांच एजेंसी की आड़ में मोदी सरकार की कितनी फजीहत होती.. यहीं पर राज्य सरकार के सूचना तंत्र की विफलता पर सवाल खड़े होते हैं.. चुनाव आचार संहिता अस्तित्व में आने से पहले ही ट्रांसफर पोस्टिंग के दौरान धन इकट्ठा करने का आरोप बीजेपी के लगाना शुरू कर दिया था..
तो क्या मुख्यमंत्री कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग कमजोर कड़ी साबित हुआ है.. सवाल क्या इसके पीछे कमलनाथ सरकार को बदनाम करने की कोई साजिश भी रची गई तो क्या इसके तार उन अधिकारियों से जोड़ते हैं जिन्होंने शिवराज के राज में भी अपनी पकड़ मजबूत रखें और फिर सरकार बदलने के बाद भी महत्वपूर्ण पदों पर डटे हुए हैं ..क्या ये  वहीलोग  जिनके सामने से ही छोटे बड़े ट्रांसफर की फाइलें आती जाती थी.. जो सरकार की बदनामी का कारण भी बनी या फिर इसके पीछे उन अधिकारियों की भी कोई भूमिका निकल सकती है जिन्हें भाजपा सरकार खूब रास आई और अब अलग-थलग पड़ चुके हैं ..
तो क्या इस कार्यवाही का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा ..जब प्रचार में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बन कर मध्य प्रदेश के मतदाताओं को सोचने को मजबूर करेगा.. क्या इसके लिए उन  अधिकारियों  और राजनेताओं  के साथ सलाहकारों को  जिम्मेदार माना जाएगा  ..जो खुद को कमलनाथ का भरोसेमंद प्रचारित करते रहे और गिने चुने लोगों को ही उन तक पहुंचने देते थे.. हालांकि कमलनाथ ने इस कार्यवाही के लिए केंद्र सरकार की नीयत पर यह कहकर सवाल खड़ा किया कि मोदी सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है.. मुख्यमंत्री कमलनाथ ले इसे चुनाव में होने वाली हार से जोड़ते हुए हथकंडा करार दिया..
उन्होंने कहा कि उनके कदम डिगेगे नहीं.. इस कार्यवाही के बाद कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान मैं जिस तरह एक दूसरे की भूमिका पर सवाल खड़े किए उसने मध्य प्रदेश की सियासत पर प्रचार अभियान के जोर पकड़ने से पहले छाए सन्नाटे को न सिर्फ तोड़ दिया बल्कि राजनीति को गरमा दिया है.. देखना दिलचस्प होगा कि नरेंद्र मोदी अमित शाह तो दूसरी ओर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार में उतरने के बाद यह कार्यवाही कमलनाथ और कांग्रेस को कमजोर साबित करेगी ..

शिवराज – कमलनाथ


या फिर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग की बहस एक नया माहौल बना कर भाजपा सरकार को संकट में डालेगी.. जहां तक बात कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति की  तो फिर कांग्रेस के सारे सूत्र इन दिनों कमलनाथ के पास है.. इसलिए उसकी एक जुटता बरकरार रखने की जिम्मेदारी भी उनकी होगी.. क्योंकि जब भी मोदी साहब इसे बड़ा मुद्दा बनाएंगे तो उनके निशाने पर कमलनाथ से ज्यादा राहुल गांधी होंगे..  टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस में भले ही कलह सामने ना आई हो लेकिन अभी कई अहम और बड़ी सीट पर उम्मीदवार को लेकर अंतिम फैसला किया जाना बाकी है..मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर आयकर विभाग के पड़े छापों में यह लेख लिखते समय तक 573 करोड़ रुपये के कालेधन के लेन – देन उजागर हो चुके हैं, जिसमें करोड़ों रुपये का कैश भी है। यही नहीं सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल के करीबी पर भी आयकर विभाग का छापा पड़ा है। वहाँ भी बड़ी संख्या में अघोषित संपत्ति और नकदी मिली है। कांग्रेस का कहना है यह बदले की कार्यवाही है, पर वह यह जबाब नहीं दे रही है कि उनके पास इतना कैश क्यों है? अभी तो अहमद पटेल भी सोनिया गांधी, राहुल गांधी के साथ अगास्ता वेस्टलैंड केस मैं भी घिरे हुए हैं। लोकतंत्र बचाओ व संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की रक्षा करने की दुहाई देने वाली कांग्रेस  वाली कांग्रेस के नेता कमलनाथ ने भी बंगाल का कांड यहाँ भी दोहरा दिया। राज्य पुलिस को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के विरुद्ध लड़ाने की नापाक  कोशिश की। आश्चर्य की बात है कि इतने कम समय में कमलनाथ ने इतनी भारी मात्रा में इतनी संपत्ति एकत्रित कर ली। यह सिद्ध करता है कि कांग्रेस के नेता भ्रष्टाचार में कितने कुशल हैं।विपक्ष कब से पूछ रहा था काला धन कहाँ है? मोदी ने बता दिया कहाँ है। अगर यह छापा कांग्रेस के घोषणा पत्र आने से पहले पड़ा होता तो कांग्रेस के घोषणा पत्र मे यह भी हो सकता था की हम आयकर विभाग ही समाप्त कर देंगे।कुछ समय पहले जब सोनिया गांधी और राहुल गांधी समस्त कांग्रेस पार्टी सहित नेशनल हेराल्ड केस में फंस गए थे तब कांग्रेस ने कहा था कि जब हम सत्ता में आएँगे तब भी हम बदले की कार्यवाही करेंगे जब सत्ता में आएँगे। जबकि यह केस विशुद्ध रूप से सुब्रहमण्यम स्वामी ने अदालती कार्यवाही करके उजागर किया था और अदालत के आदेश पर ही इसकी आगे जाँच आगे बढ़ी थी। फिर पिछले 60 साल तो कांग्रेस ही सत्ता में रही थी तब कांग्रेस ने कायवाही क्यों नहीं की? भ्रष्टाचारी कोई भी हो किसी भी दल का हो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। फिर यह याद कीजिये मोदी ने काले धन पर प्रहार करने की बात तो 2014 में कह दी थी। कांग्रेस सोच रही थी कि ऐसा तो वह पिछले 60 साल से कह रहे हैं ऐसे ही मोदी भी कह रहे होंगे। पर वह मोदी को समझने में भूल कर गए। मोदी जो कहता है करता भी है। यही वजह है कि आज विपक्ष के नेता मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। जहाँ मोदी अपनी सभाओं में भारत माता की जय, वन्दे मातरम के नारे लगवाते हैं वहीं राहुल गांधी प्रधानमंत्री के खिलाफ चौकीदार चोर है के नारे लगवा कर अपनी घटिया मानसिकता का परिचय दे रहे हैं। प्रधानमंत्री पद का अपमान कर रहे हैं। वैसे भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पद का कभी सम्मान नहीं किया, याद ही होगा कैसे मनमोहन सिंह का अध्यादेश फाड़ दिया था। राहुल लगातार झूठ पर झूठ बोल रहे हैं।जहाँ तक बदले की कार्यवाही की बात है तो अभी कुछ महीने पहले जब चुनावों की तारीख भी घोषित नहीं हुई थी, आचार संहिता भी लागू नहीं हुई थी, तब हमारे शहर में दो भाजपा नेताओं पर भी आयाकर विभाग ने छापा डाला। जबकि राज्य व केंद्र दोनों में ही भाजपा सरकार है। तब तो आचार संहिता लागू नहीं हुई थी इसलिए प्रशासन भी सरकार के हाथों में ही था। इससे साधारण जन में यह विश्वास पैदा हुआ कि यह सरकार कर वंचना करने वालों को सिर्फ इस बिना पर छोड़ने वाली नहीं है क्योंकि वह उनके दल से हैं। यह सरकार बिना भेदभाव के काम कर रही है। अब काला धन रखने वाले, हवाला कारोबारी बचने वाले नहीं हैं। जो भी सामान्य जन है भले ही वह किसी भी दल से संबंध क्यों न रखता हो, वह भ्रष्ट लोगों पर कार्यवाही से प्रसन्न ही होगा अगर वह स्वयं भ्रष्ट न हो या किसी भी दल के प्रति दुर्भाव न रखता हो। जो किसी का भी अन्ध विरोधी न हो। इस उम्मीद के साथ कि आयकर विभाग व अन्य एजेंसियां इसी प्रकार काम करती रहेंगी और आने वाले समय में और भी भ्रष्ट नेता और उनके साथ गठजोड़ करने वाले बेनकाब होंगे, चाहे वह किसी भी दल के हों।

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