हेमचंद यादव न सिर्फ दुर्ग के बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के गौरव थे

छत्तीसगढ़ का बेदाग़ हीरा हेमचंद यादव की आज पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन

-पी के तिवारी / लेखक एवं पत्रकार/


मंज़िलें नहीं रास्ते बदलते है

जगा लो जज्बा जीतने का

किस्मत कि लकीरें चाहे बदले न बदले

वक़्त जरूर बदलता है 

हौसलाअफ़ज़ाई में किसी शायर के लिखे यह शब्द उस शख्स पर बखूबी लागू होते है जो, दुर्ग शहर की उस राह पर चल पड़ा था जहाँ सपनो का हसीन संसार होता है। उम्मीदों की नई किरणे होती हैं, इन सब के बीच मुश्किलों का वह दौर भी होता है, जब अादमी टूटने लगता है। काबिले तारीफ वह है जो, इन मुश्किलों की अांधी को चीरता हुअा अागे निकल जाए। बचपन से ही कुछ नया कर गुजरने की चाह लिए वह अपने गांव की ख़ुश्बू, अमियाँ की छाँव, गांव की नौटंकी और उस दूधिया की पहचान छोड़ एक अलग पहचान बनाई, जहां उसके जीवन का नया इतिहास रचा जाना था। वह न सोना था, ना कनक था और ना ही कुंदन फीर भी माँ-बाबूजी की नजर में वह “हेम” था। कहने का तात्पर्य 100 प्रतिशत शुद्ध तपनीय सोना। हेम का अर्थ भी तो सोना ही होता है। तभी तो वह “हेम” का चन्द्र अर्थात “हेमचन्द्र”।


परिंदो को मिलेगी मंज़िल एक दिन

ये फैले हुए उनके पर बोलते है

और वही लोग रहते है खामोश अक्सर

ज़माने में जिनके हुनर बोलते है।


नगर के पूर्व विधायक छत्तीसगढ़ शासन के भू.पू.मंत्री, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष हेमचंद यादव न सिर्फ दुर्ग के बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के गौरव थे। गुदड़ी के इस लाल ने अपने दम पर अपनी पृथक और विशिष्ट पहचान बनाई है। आज उनके न रहने से  समूचा छत्तीसगढ़ दुःखी है छत्तीसगढ़ ने एक हीरा खो दिया ,उनका परिचय देकर हम महज औपचारिकता निभा रहे हैं। दुर्ग का बच्चा-बच्चा अपने इस लाडले नेता से भली परिचित है। उनका सार्वजनिक जीवन एक खुली किताब की तरह सबके सामने है।
दुर्ग शहर व ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदो सभी से हेमचंद यादव का जीवत संबंध बना रहा है। जबकि वह पूर्व विधायक थे और पूर्व मंत्री थे फिर भी उनके बैगापारा स्थित निवास में हर दिन लोगों का हुजुम रहता था और वे सभी से आत्मीयता से मिलते थे और गंभीरता से उनकी बातें सुनते थे। न तो उन्हें कभी मंत्री पद का घमंड रहा है और नहीं उनके व्यवहार में बदलाव आया है।  वे जमीन से जुड़े हुए और लोग उन्हें उनके नाम से पुकारते हैं।
राजनीति में ऐसे सहज, सरल और ईमानदार नेता बिरले ही होते हैं, जो अपना सारा जीवन जनसेवा के लिए समर्पित कर देते हैं, हेमचंद यादव भी ऐसे ही नेता है जो भागवत गीता में, भगवान श्रीकृष्ण के संदेश कि कर्म करो, फल की इच्छा मत करो अपना आदर्श मानते हैं। निष्काम भाव से अपना काम करने वाले  ऐसे कर्म योद्धा हेमचंद यादव एक मात्र ऐसे नेता है, जिन पर आज तक कोई आरोप नहीं लगा। काजल की कोठरी में रहने के बावजूद उनके उजले दामन पर आज तक दाग नहीं लगा है। जहां तक कि विपक्ष भी उनकी ईमानदारी का कायल रहा है।
नेतृत्व के स्वाभाविक गुणों के साथ जन्में हेमचंद यादव ने गैरराजनीतिक युवा संगठन के माध्यम से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की । 1988 तक बेराजगार संघ के जिला अध्यक्ष के साथ साथ जय शीतला युवा वृंद और शीतला मंदिर समिति के अध्यक्ष का पद संभाला उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के विचारों और सिद्धांतों को स्वयं के अनुकूल पाकर 1988 में बैगापारा वार्ड अध्यक्ष के रुप में राजनीतिक जीवन में पहला कदम रखा इसके बाद निरंतर आगे बढऩे का ही क्रम चला । आज के युवाओं को राजनीति में तत्काल ही परिणाम और सफलता की चाह होती है ऐसे में हेमचंद यादव भाजपा की राजनीति में पार्टी के युवाओं के लिए आदर्श हैं उन्होनें वार्ड अध्यक्ष जैसे जमीनी स्तर पर काम करने से लेकर भाजयुमो शहर अध्यक्ष, भाजपा शहर अध्यक्ष, भाजपा जिला अध्यक्ष, विधायक और केबिनेट मंत्री तक की राजनीतिक यात्रा में कभी तत्काल परिणाम पाने और सफलता के लिए शार्टकट तरीका अपनाने की कोशिश नही की । संगठन को सर्वोपरि मानकर स्वयं को हमेशा परिस्थितियों के अनुरुप ढालना ही उनकी सफलता के कारणों में से एक है ।
1990 में हेमचंद यादव जी के भाजयुमो शहर अध्यक्ष बनने के बाद जब संगठन मंत्री स्व. गोविन्द सारंग जी का दुर्ग प्रवास हुआ तब पहली मुलाकात में ही उन्होने हेमचंद यादव के अदंर छिपी संगठन क्षमता को परख लिया और दुर्ग शहर में भाजपा का परचम लहराते देखना स्व. सारंग जी की तमन्ना थी उन्होने तत्काल हेमचंद यादव के सामने चुनौती रखते हुए कहा दुर्ग शहर के सभी 45 वार्डों में जिस दिन युवा मोर्चा की ईकाई का गठन करके उनकी सामुहिक बैठक एक स्थान पर रखोगे उसी दिन तुम शहर भाजयुमो अध्यक्ष के अपने पद से न्याय कर सकोगे । हेमचंद यादव ने इस चुनौती को स्वीकार करके एक महीने का समय लिया और इस काम को कर दिखाया । जब छितरमल धर्मशाला के हाल में स्व. गोविन्द सारंग जी ने सभी भाजयुमो वार्ड अध्यक्षों को एक के बाद एक खड़े करके उनका और उनकी टीम का परिचय लिया और वार्ड अध्यक्षों की शत-प्रतिशत उपस्थिति देखकर सारंग जी ने कहा कि अब मुझे विश्वास है कि दुर्ग में कांग्रेस का किला जरुर ढहेगा ।


1992 में शहर भाजपा अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से हुआ, हेमचंद यादव इस संगठनात्मक चुनाव में भाग लिया और निर्वाचित होकर शहर भाजपा की कमान संभाली । जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है इन पंक्तियों को युवा हेमचंद यादव ने अपनी टीम के साथ साबित करके दिखाया । 1993 में पार्टी ने जब पहली बार पार्टी ने उन्हे दुर्ग विधानसभा का प्रत्याशी बनाया तो पूरे जोश के साथ चुनाव लड़ा, एक तरफ सीमित साधनों के साथ कृषक पुत्र और दूसरी तरफ अथाह साधन-संसाधनों से लैस बरसों से दुर्ग की राजनीति में परंपरागतरुप से स्थापित वोरा परिवार । धारा के विपरीत बहकर भी 52088 वोट हेमचंद यादव को मिले जो कि पार्टी के पक्ष में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था । इस चुनाव में 17120 वोटों से हारकर भी कार्यकर्ताओं के जोश को हेमचंद यादव जी ने बरकरार रखा क्योंकि निराशा और हताशा जैसे शब्द हेमचंद यादव के लिए बने ही नही है ।हेमचंद यादव जी के शहर भाजपा अध्यक्ष के सफल कार्यकाल से प्रभावित पार्टी ने उन्हे 1996 में जिला भाजपा की कमान सौंपी इस दौरान जब वे प्रदेश भाजपा की बैठकों में शामिल होने भोपाल जाया करते थे तब वहां दुर्ग विधानसभा सीट को लेकर कटाक्ष होते थे कि जिस दिन भाजपा मध्यप्रदेश की 320 सीटों में से 319 सीटें जीत लेगी तब हारने वाली जो 1 सीट बचेगी वह दुर्ग की ही सीट होगी, दुर्ग में भाजपा की जीत सिर्फ एक सपना है लेकिन कटाक्ष करने वालों को 1998 में जवाब मिल गया जब हेमचंद यादव ने पहली बार दुर्ग में भाजपा का परचम लहराया इस बार धारा के विपरीत बहने बाद भी दुगुने जोश से भरी उनकी युवा टीम ने ऐसा कमाल करके दिखाया जिसकी कल्पना पार्टी के वरिष्ठों ने भी कभी नही की थी 73766 वोट पाकर हेमचंद यादव ने 3279 वोटों के अंतर से चुनाव जीता । चुनाव जीतने के बाद हेमचंद यादव जब पहली बार विधायक के रुप में भोपाल विधानसभा पहुंचे तब वहां उनसे मिलने के लिए विधायकों का तांता लग गया हर कोई देखना और मिलना चाहता था कि कौन है वो जिसने दुर्ग में वोरा परिवार का वर्चस्व खत्म करके रिकार्ड बनाया है । कांग्रेस शासनकाल में विपक्ष का विधायक रहते हुए भी जनता के लिए संघर्ष करने में कभी पीछे नही हटे । इसी का परिणाम रहा कि 2003 में दोबारा इतिहास रचा और 107484 वोट पाकर 22573 वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की । भाजपा सरकार में जब उन्हे मंत्री बनाया गया तब दुर्ग शहर में उत्सव सा माहौल बना क्योंकि पहली बार दुर्ग शहर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक को मंत्री का पद मिला था । जनता व कार्यकर्ता के लिए सहज उपलब्धता और सरल व्यवहार से ही हेमचंद यादव ने लोगों के दिलों में जगह बनाई है । यही कारण है कि 2008 के विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होने हैट्रिक बनाई और दोबारा मंत्री पद की शपथ ली ।
चुनाव मैनेजमेंट में हेमचंद यादव की जबरदस्त विशेषज्ञता उन्हे बाकी राजनीतिज्ञों से अलग करती है, बतौर मुख्य चुनाव संचालक आधा दर्जन से ज्यादा चुनावों में उन्होने पार्टी को जीत दिलाई है और हर चुनाव अपने आप में चुनौतीपूर्ण था । 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्होने दुर्ग विधानसभा के मुख्य चुनाव संचालक की भूमिका निभाकर अपने विधानसभा में पार्टी को जिताया इसके बाद 2004 में दुर्ग लोकसभा चुनाव, 2004 में दुर्ग नगर निगम चुनाव, 2005 में भिलाई नगर निगम चुनाव, 2007 में खैरागढ़ उपचुनाव, 2009 में दुर्ग लोकसभा चुनाव, और 2009 में ही दुर्ग नगर निगम चुनाव में मुख्य चुनाव संचालक के रुप में पार्टी द्वारा दी गई चुनौती को सफलता में बदलकर दिखाया। हर बार उन्होने चुनाव मैनेजमेंट के अपने कौशल का जबरदस्त प्रदर्शन किया और पार्टी का सिर झुकने नही दिया। इन सबमें जून 2007 में खैरागढ़ विधानसभा चुनाव विशेष रुप से चर्चा करने योग्य है, क्योंकि खैरागढ़ मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में ऐसी सीट रही जिसमें कभी भाजपा नही जीती थी, राजपरिवार के वर्चस्व वाली यह सीट वास्तव में भाजपा के लिए एक कठिन चुनौती थी लेकिन हेमचंद यादव ने दुर्ग के इतिहास को दोहराते हुए कांग्रेस के इस किले को भी ढहा दिया । इस चुनाव को महल और हल की लड़ाई निरुपित कर किसान परिवार के साधारण पार्टी कार्यकर्ता कोमल जंघेल को इस चुनाव में 15987 वोटों से जीताकर पार्टी का सिर ऊंचा किया ।  राजनीति के हर क्षेत्र में चाहे नेतृत्व क्षमता का मामला हो, चाहे राजनीतिक कौशल का मामला हो या फिर चुनाव मैनेजमेंट का मामला हो सभी में उन्हे महारत हासिल है यही कारण है कि विपक्षी कितने हथकंडे अपना ले, बिना विचलित हुए वे सहज भाव से अपना काम करते हैं यही उनकी सफलता का राज है । एक कुशल राजनेता के साथ जननेता के रुप में उन्होने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है 
आज़ादी के बाद 1993तक दुर्ग में केवल कांग्रेस का राज था परन्तु 1993 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मजबूत दावेदार हेमचंद यादव ने कांग्रेस के लिए एक चुनौती साबित हुए हालाँकि 1993के चुनाव में भाजपा के हेमचंद यादव की हार हुई किन्तु बहुत कम अंतर से हार ने भाजपा को अगले चुनाव में फिर से मजबूती से लड़ने के लिए प्रेरणा द्दी और 1998 में दुर्ग की जनता का कांग्रेस से मोहभंग हुआ और भाजपा के नेता हेमचंद यादव की जीत हुई | हेमचंद यादव पहली बार १९९८ में कांग्रेस के गढ़ को ध्वस्त करते हुए दुर्ग का प्रतिनिधितव करते हुए विधानसभा में पहुंचे तब छत्तीसगढ़ का जन्म ही नहीं हुआ था |हालाँकि तब मध्यप्रदेश में कांग्रेस का शासन रहा और छत्तीसगढ़ का इलाका अभी भी उपेक्षित ही रहा | दुर्ग के कांग्रेसी नेता तो अपने आप को स्थापित कर लिए थे किन्तु दुर्ग अभी भी उपेक्षित था | भिलाई इस्पात सयंत्र के नाम से ही पहचान थी दुर्ग की परन्तु दुर्ग की हालत अभी भी बदत्तर ही थी | 2003 में एक बार फिर विधान सभा चुनाव हुए और इस बार दुर्ग शहर छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंतर्गत आने वाला विधानसभा क्षेत्र बना |2003 में जब भाजपा की सरकार बनी तो दुर्ग के विधायक हेमचंद यादव को रमन सरकार में मंत्री पद मिला तब दुर्ग की जनता को लगा  कि अब दुर्ग शहर का विकास होगा और हुआ भी यही दुर्ग की जनता ने जो विश्वास हेमचंद यादव पर किया उस पर हेमचंद यादव खरे उतारे | अपने सहज सरल स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले हेमचंद यादव ने दुर्ग में परिवर्तन की लहर चलाई कांग्रेस के वर्षो के शासन के बाद भी दुर्ग शहर विकास के नाम पर रेंग रहा था उसे रफ़्तार दी हेमचंद यादव ने | हेमचंद यादव जमीन से जुड़े हुए व्यक्तित्व थे उन्हें राजनीती विरासत में नहीं मिली थी और यही कारण था कि वो दुर्ग की आम जनता के दर्द को करीब से समझते थे और उनके निवारण के लिए हमेशा तैयार रहते थे | हेमचंद यादव ने कांग्रेस के परिवारवाद की राजनीती को ख़त्म कर भाजपा के कमल को खिलाया और निरंतर जीवन पर्यंत दुर्ग शहर की सेवा में लगे रहे | दुर्ग शहर की जनता के दिलो में हेमचंद हमेशा बसते रहेंगे |हालाँकि लगातार टी बार भाजपा के विधायक रहने के बाद २०१३ के विधानसभा चुनाव में हेमचंद यादव की हार हुई थी किन्तु सभी को मालुम है कि हेमचंद यादव को किस तरह भीतरीघात का सामना करना पड़ा था और मामूली अंतर से हेमचंद यादव चुनाव हारे थे और यही भीतरीघात का सामना लोक सभा में डॉ सरोज पाण्डेय की हार का कारण बना |
हेमचंद यादव एक शख्सियत एक इतिहास ….

हेमचंद यादव का जन्म एक दिसंबर 1959  को दुर्ग के बैगापारा में एक कृषक परिवार में हुआ था | हेमचंद यादव ने बी ए . तक की शिक्षा ग्रहण की थी | हेमचंद यादव ४ भाई और ४ बहनों के भरे पुरे परिवार में पले बढे | हेमचंद यादव की शादी श्रीमति लीलावती से हुई | हेमचंद यादव की चार संताने २ पुत्र और २ पुत्री सहित भरापूरा परिवार था जो आज भी बैगापारा दुर्ग में निवासरत है |हेमचंद यादव जी की छत्तीसगढ़ राज में यादव समाज में अपनी एक ख्हस पहचान और मान है |हेमचंद यादव जी ढोल मजीरा एवं जसगीत में पारंगत थे उनकी ढोल की थप पर सभी मंत्रमुग्ध हो जाते थे | हेमचंद जी ने राजनीती के सफ़र की शुरवात में बेरोजगार संघ का गठन किया था और रोजगार स्वरोजगार की मांग को बूबुलंद किया था | 1986 में भाजपा के वार्ड अध्यक्ष बनाने के बाद कभी पीछे मुड कर नहीं देखा और जीवन के अंतिम पड़ाव में प्रदेश उपाध्यक्ष रहे संगठन में | हेमचंद जी लगातार तीन बार भाजपा के विधायक रहे और सरकार में महतवपूर्ण विभागों के मंत्री भी बने | जीवन के अंतिम वर्षो में जानलेवा बीमारी से ग्रषित हेमचंद यादव बीमारी से लड़ते हुए 11 अप्रैल 2018 को इस संसार से विदा हुए |
हेमचंद यादव जी दुर्ग राजनीती के वो सितारे थे जिन्हें दुर्ग और प्रदेश की जनता कभी भूल नहीं सकती उनकी क्षति को छत्तीसगढ़ भाजपा किसी भी तरह भर नहीं सकती | सरल व्यतितव के धनी हेमचंद जी यादव को दुर्ग की राजनीती का ध्रुव तारा कहा जाए तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी | हेमचंद जी यादव दुर्ग की जनता के दिलो में आज भी जीवित है और उनका मार्गदर्शन उनके विचारो के द्वारा आज भी उनसे जुड़े लोगो को मिलता रहता है | जमीन से उठे और आसमान की उचाइयो को छुने वाले हेमचंद यादव जी को शौर्यपथ समाचार पत्र उनके जन्मदिन १ दिसंबर को अश्रुपूर्ण श्रधांजलि सहित सादर नमन करता है |
पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता हेमचंद यादवा का सफरनामा—
1. 1988 तक बेराजगार संघ के जिला अध्यक्ष के साथ साथ जय शीतला युवा वृंद और शीतला    मंदिर समिति के अध्यक्ष ।2. 1988 में भाजपा से राजनीतिक जीवन की शुरुआत बैगापारा वार्ड अध्यक्ष के रुप में वार्ड    अध्यक्ष से लेकर भाजयुमो शहर अध्यक्ष, भाजपा शहर अध्यक्ष, भाजपा जिला अध्यक्ष,    विधायक और केबिनेट मंत्री तक की राजनीतिक यात्रा।3. 1992 में शहर भाजपा अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से हुआ, हेमचंद यादव ने इस    संगठनात्मक चुनाव में भाग लिया और निर्वाचित होकर शहर भाजपा की कमान संभाली। 4. 1993 में पार्टी ने जब पहली बार पार्टी ने उन्हे दुर्ग विधानसभा का प्रत्याशी बनाया लेकिन वे    पहले चुनाव जीतने में विफल रहे। बावजूद इसके पार्टी ने 1996 में पार्टी ने उन्हें को जिला    भाजपा की कमान सौंपी।5. 1998 में फिर से हेमचंद यादव को टिकट मिला. और इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की किला    ढहाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा को करारी शिकस्त दी।6. 2003 में हेमचंद दोबारा इतिहास रचा और 107484 वोट पाकर 22573 वोटों से ऐतिहासिक   जीत दर्ज की।7. 2003 में रमन सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।8. 2008 में फिर हेमचंद यादव को भाजपा ने टिकट दी और उन्होंने जीत की हैट्रिक बनाई।    दूसरी बार 2008 में रमन सरकार में वे कैबिनेट मंत्री इसके साथ ही हेमचंद यादव ने पार्टी में    रहते हुए कई प्रमुख जिम्मेदारियां निभाई।9. 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्होने दुर्ग विधानसभा के मुख्य चुनाव संचालक   2004 में दुर्ग लोकसभा चुनाव, 2004 में दुर्ग नगर निगम चुनाव, 2005 में भिलाई नगर    निगम चुनाव, 2007 में खैरागढ़ उपचुनाव, 2009 में दुर्ग लोकसभा चुनाव, और 2009 में ही    दुर्ग नगर निगम चुनाव में मुख्य चुनाव संचालक 2013 में पार्टी ने उन्हें पांचवीं बार दुर्ग शहर    से मैदान में उतारा लेकिन वे चुनाव हार गए। पार्टी उन्हें संगठन की महत्वपूर्व जिम्मेदारी दी    और उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया।


हेमचंद यादव जी दुर्ग राजनीती के वो सितारे थे जिन्हें दुर्ग और प्रदेश की जनता कभी भूल नहीं सकती उनकी क्षति को छत्तीसगढ़ भाजपा किसी भी तरह भर नहीं सकती | सरल व्यतितव के धनी हेमचंद जी यादव को दुर्ग की राजनीती का ध्रुव तारा कहा जाए तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी | हेमचंद जी यादव दुर्ग की जनता के दिलो में आज भी जीवित है और उनका मार्गदर्शन उनके विचारो के द्वारा आज भी उनसे जुड़े लोगो को मिलता रहता है | जमीन से उठे और आसमान की उचाइयो को छुने वाले हेमचंद यादव जी को गंभीर समाचार पत्र 11 अप्रैल उनकी पुण्यतिथि को अश्रुपूर्ण श्रधांजलि सहित सादर नमन करता है |

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